पुरानी बनाम नई टैक्स रिजीम FY 2026-27: किसमें ज़्यादा बचत?
सीधा जवाब: नई टैक्स रिजीम (व्यवस्था) डिफ़ॉल्ट है। इसके रिबेट से ₹12 लाख तक की टैक्स योग्य आमदनी टैक्स-फ़्री हो जाती है — ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटने के बाद करीब ₹12.75 लाख की सैलरी। पुरानी रिजीम तभी जीतती है जब आपकी कटौतियाँ बड़ी हों: ₹25 लाख या उससे ज़्यादा की सैलरी पर उसके सस्ते पड़ने के लिए करीब ₹8 लाख की कटौतियाँ चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनभोगियों और बिज़नेस वालों के अपने नियम हैं, जो नीचे दिए हैं। पक्का जानने का एक ही तरीक़ा है — अपने आँकड़ों पर दोनों निकालिए।
आप किस साल के लिए फ़ैसला कर रहे हैं?
इस समय दो टैक्स साल एक साथ चल रहे हैं, और दोनों अलग-अलग क़ानूनों के तहत आते हैं:
- FY 2026-27 — वह साल जिसमें आप अभी कमा रहे हैं — आयकर अधिनियम, 2025 के तहत आता है, जो इसे टैक्स ईयर 2026-27 कहता है। इसके लिए रिजीम आप 2027 में रिटर्न भरते समय चुनेंगे।
- FY 2025-26 (AY 2026-27) — पिछला साल — आयकर अधिनियम, 1961 के तहत आता है। इसके रिटर्न इसी गर्मी में भरने थे; देर से भरा या संशोधित रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक अब भी भरा जा सकता है।
नीचे दिए स्लैब, रिबेट और हर कटौती की सीमा दोनों सालों में एक जैसी है। बदले हैं तो सिर्फ़ धाराओं के नंबर:
| क्या है | आयकर अधिनियम, 1961 (FY 2025-26) | आयकर अधिनियम, 2025 (FY 2026-27) |
|---|---|---|
| नई रिजीम | धारा 115BAC | धारा 202 |
| रिबेट | धारा 87A | धारा 156 |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | धारा 16(ia) | धारा 19(1), टेबल क्रम सं. 2 |
| PF, PPF, ELSS, जीवन बीमा | धारा 80C | धारा 123, अनुसूची XV के साथ |
| हेल्थ इंश्योरेंस | धारा 80D | धारा 126 |
| होम लोन का ब्याज | धारा 24(b) | धारा 22(1)(b) |
नई रिजीम: स्लैब, स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट
| टैक्स योग्य आमदनी | दर |
|---|---|
| ₹4,00,000 तक | शून्य |
| ₹4,00,001 – ₹8,00,000 | 5% |
| ₹8,00,001 – ₹12,00,000 | 10% |
| ₹12,00,001 – ₹16,00,000 | 15% |
| ₹16,00,001 – ₹20,00,000 | 20% |
| ₹20,00,001 – ₹24,00,000 | 25% |
| ₹24,00,000 से ऊपर | 30% |
स्लैब के ऊपर तीन चीज़ें और लगती हैं:
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: स्लैब लगने से पहले सैलरी या पेंशन में से ₹75,000 घटते हैं।
- रिबेट: जिस निवासी व्यक्ति की टैक्स योग्य आमदनी ₹12,00,000 तक है, उसे ₹60,000 तक का रिबेट मिलता है, जिससे टैक्स शून्य हो जाता है। अनिवासी (NRI) और HUF को यह नहीं मिलता।
- सेस और सरचार्ज: टैक्स पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस। ₹50 लाख से ज़्यादा आमदनी पर सरचार्ज भी जुड़ता है — ₹1 करोड़ तक 10%, ₹2 करोड़ तक 15% और उससे ऊपर 25%।
₹12 लाख से ज़रा ऊपर मार्जिनल राहत। ₹12 लाख पार करते ही पूरे स्लैब का टैक्स नहीं लगता: टैक्स उतना ही हो सकता है जितनी आमदनी ₹12 लाख से ऊपर है। ₹13 लाख की सैलरी पर टैक्स योग्य आमदनी ₹12.25 लाख बनती है, यानी सीमा से ₹25,000 ऊपर, इसलिए टैक्स ₹63,750 की जगह ₹25,000 और सेस है। FY 2025-26 के लिए विभाग के रिटर्न नियम इस राहत का अंत ₹12,70,590 की कुल आमदनी पर बताते हैं।
| ₹13 लाख सैलरी, कोई कटौती नहीं | सेस सहित टैक्स |
|---|---|
| नई रिजीम (₹12,25,000 टैक्स योग्य, मार्जिनल राहत) | ₹26,000 |
| पुरानी रिजीम (₹12,50,000 टैक्स योग्य) | ₹1,95,000 |
पुरानी रिजीम: उम्र के हिसाब से स्लैब, और उसकी कटौतियाँ
पुरानी रिजीम में तीन स्लैब टेबल हैं। बड़ी उम्र वाली दो टेबल निवासी वरिष्ठ नागरिकों के लिए हैं।
| दर | 60 से कम | 60 से 80 | 80 और ज़्यादा |
|---|---|---|---|
| शून्य | ₹2,50,000 तक | ₹3,00,000 तक | ₹5,00,000 तक |
| 5% | ₹2,50,001 – ₹5,00,000 | ₹3,00,001 – ₹5,00,000 | — |
| 20% | ₹5,00,001 – ₹10,00,000 | ₹5,00,001 – ₹10,00,000 | ₹5,00,001 – ₹10,00,000 |
| 30% | ₹10,00,000 से ऊपर | ₹10,00,000 से ऊपर | ₹10,00,000 से ऊपर |
यहाँ स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 है, और ₹5,00,000 तक की कुल आमदनी पर ₹12,500 तक का रिबेट मिलता है। ₹5 करोड़ तक सरचार्ज की दरें नई रिजीम जैसी ही हैं; ₹5 करोड़ से ऊपर पुरानी रिजीम 37% लेती है, जबकि नई रिजीम 25% पर रुक जाती है — उसमें ₹5 करोड़ से ऊपर कोई अलग दर है ही नहीं।
पुरानी रिजीम को सोचने लायक़ बनाती हैं उसकी कटौतियाँ:
| कटौती | धारा (1961 → 2025) | सीमा |
|---|---|---|
| PF, PPF, ELSS, जीवन बीमा, होम लोन का मूलधन, ट्यूशन फ़ीस | 80C → 123 | कुल मिलाकर ₹1,50,000 |
| अपना NPS योगदान, अलग से | 80CCD(1B) → 124(3) | ₹50,000 |
| हेल्थ इंश्योरेंस | 80D → 126 | आप और परिवार के लिए ₹25,000, माता-पिता के लिए ₹25,000 और — वरिष्ठ नागरिक हों तो हर हिस्से में ₹50,000 |
| होम लोन का ब्याज, अपने रहने वाला घर | 24(b) → 22(1)(b) | ₹2,00,000 |
| हाउस रेंट अलाउंस | 10(13A) → अनुसूची III | तीन सीमाओं में सबसे कम — देखिए HRA गाइड |
| एजुकेशन लोन का ब्याज | 80E → 129 | पूरा ब्याज, 8 साल तक |
| बचत खाते का ब्याज (60 से कम) | 80TTA → 153 | ₹10,000 |
| जमा पर ब्याज (वरिष्ठ नागरिक) | 80TTB → 153 | ₹50,000 |
| HRA न मिलने पर दिया किराया | 80GG → 134 | हर महीने ₹5,000, बाक़ी सीमाओं के भीतर |
| कुछ ख़ास बीमारियों का इलाज | 80DDB → 128 | ₹40,000, वरिष्ठ नागरिक के लिए ₹1,00,000 |
| दिव्यांगता (अपनी, या आश्रित की) | 80U → 154, 80DD → 127 | ₹75,000, गंभीर दिव्यांगता पर ₹1,25,000 |
नई रिजीम में क्या अब भी मिलता है — और क्या नहीं
नई रिजीम ज़्यादातर कटौतियों के बिना आमदनी जोड़ती है। फिर भी इसमें मिलता है:
- सैलरी या पेंशन पर ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन;
- आपके नियोक्ता का NPS योगदान, हर तरह के नियोक्ता के लिए सैलरी के 14% तक (80CCD(2), FY 2026-27 से धारा 124(1));
- FY 2025-26 के लिए अग्निवीर कॉर्पस फ़ंड में योगदान, फ़ैमिली पेंशन का एक-तिहाई ₹25,000 तक, और किराये पर दिए घर के लोन का ब्याज।
इसमें नहीं मिलतीं, और भी बहुत-सी कटौतियों के साथ: 80C, 80CCD(1B), 80D, 80DD, 80DDB, 80EE, 80EEA, 80G, 80TTA, 80TTB और 80U; HRA, लीव ट्रैवल कंसेशन और प्रोफ़ेशनल टैक्स; अपने रहने वाले घर के लोन का ब्याज; और हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को सैलरी से घटाना। FY 2026-27 के लिए 2025 के अधिनियम की धारा 202 इन्हें धारा-नंबर से रोकती है और उस अध्याय से सिर्फ़ चार कटौतियाँ रखती है: धारा 124(1), 124(2), 125(2) और 146।
पुरानी रिजीम को जीतने के लिए कितनी कटौती चाहिए?
60 से कम उम्र के नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए, यह पुरानी रिजीम की वह सबसे कम कुल कटौती है — स्टैंडर्ड डिडक्शन छोड़कर — जिस पर पुरानी रिजीम का टैक्स नई से ज़्यादा नहीं रहता:
| सैलरी | पुरानी रिजीम को चाहिए कटौतियाँ | नई रिजीम में टैक्स |
|---|---|---|
| ₹10 लाख | ₹4,50,000 | ₹0 |
| ₹12.75 लाख | ₹7,25,000 | ₹0 |
| ₹15 लाख | ₹5,44,000 | ₹97,500 |
| ₹20 लाख | ₹7,09,000 | ₹1,92,400 |
| ₹25 लाख | ₹8,00,000 | ₹3,19,800 |
| ₹30 लाख | ₹8,00,000 | ₹4,75,800 |
| ₹50 लाख | ₹8,00,000 | ₹10,99,800 |
दो बातें साफ़ दिखती हैं:
- करीब ₹12.75 लाख तक नई रिजीम कोई टैक्स नहीं लेती, इसलिए पुरानी रिजीम तभी बराबरी पर आती है जब कटौतियाँ टैक्स योग्य आमदनी को ₹5 लाख तक ले आएँ। इसीलिए ₹12.75 लाख पर यह आँकड़ा सबसे ऊँचा है।
- करीब ₹25 लाख से यह आँकड़ा रुक जाता है: दोनों रिजीम अपने 30% स्लैब में होती हैं, इसलिए उनका फ़र्क़ तय हो जाता है, और उससे ऊपर हर सैलरी पर पुरानी रिजीम को ₹8 लाख की कटौतियाँ चाहिए।
बहुत कम नौकरीपेशा लोग ₹8 लाख तक पहुँचते हैं: 80C की सीमा, अतिरिक्त NPS, हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन के ब्याज की सीमा मिलाकर HRA से पहले ₹4.25 लाख होते हैं।
नौकरीपेशा: हल किए गए उदाहरण
बड़ी कटौतियों के साथ ₹18 लाख की सैलरी — 80C में ₹1,50,000, 80CCD(1B) में ₹50,000 का NPS, ₹25,000 का हेल्थ इंश्योरेंस, ₹2,00,000 होम लोन का ब्याज और ₹2,40,000 की HRA छूट, कुल ₹6,65,000:
| ₹18 लाख सैलरी, ₹6,65,000 की कटौतियाँ | सेस सहित टैक्स |
|---|---|
| नई रिजीम (कटौतियाँ नहीं मिलतीं) | ₹1,50,800 |
| पुरानी रिजीम | ₹1,43,520 |
पुरानी रिजीम थोड़े से अंतर से जीतती है — और सिर्फ़ इसलिए कि यह व्यक्ति HRA और होम लोन दोनों क्लेम करता है।
₹60 लाख की सैलरी, पुरानी रिजीम में ₹4,50,000 की कटौतियों के साथ। दोनों रिजीम में 10% सरचार्ज लगता है:
| ₹60 लाख सैलरी, ₹4,50,000 की कटौतियाँ | सरचार्ज और सेस सहित टैक्स |
|---|---|
| नई रिजीम | ₹15,52,980 |
| पुरानी रिजीम | ₹16,73,100 |
वरिष्ठ नागरिक और पेंशनभोगी
- पुरानी रिजीम वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी शून्य-टैक्स सीमा देती है — 60 से 80 पर ₹3 लाख और 80 या ज़्यादा पर ₹5 लाख — जबकि नई रिजीम में हर उम्र के लिए एक ही टेबल है।
- पेंशन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, दोनों रिजीम में: नई में ₹75,000, पुरानी में ₹50,000।
- जमा पर ब्याज और हेल्थ इंश्योरेंस — 80TTB में ₹50,000 और 80D में ₹50,000 तक — सिर्फ़ पुरानी रिजीम में गिने जाते हैं।
- 75 या ज़्यादा उम्र पर, जिस निवासी की आमदनी सिर्फ़ पेंशन और उसी तय बैंक के ब्याज से है, वह बैंक को घोषणा देकर रिटर्न भरने से बच सकता है: बैंक ही टैक्स निकालकर काट लेता है।
उदाहरण: ₹9,00,000 की पेंशन और ₹1,50,000 का फ़िक्स्ड डिपॉज़िट ब्याज, पुरानी रिजीम में 80TTB के ₹50,000 और 80D के ₹50,000 के साथ।
| उम्र 68: ₹10.5 लाख पेंशन और ब्याज | सेस सहित टैक्स |
|---|---|
| नई रिजीम (₹9,75,000 टैक्स योग्य, रिबेट के भीतर) | ₹0 |
| पुरानी रिजीम | ₹93,600 |
| यही आँकड़े, उम्र 82 | सेस सहित टैक्स |
|---|---|
| नई रिजीम | ₹0 |
| पुरानी रिजीम | ₹83,200 |
करीब ₹12.75 लाख से कम आमदनी वाले ज़्यादातर पेंशनभोगियों के लिए, पुरानी रिजीम के वरिष्ठ-लाभों के बाद भी नई रिजीम सस्ती पड़ती है।
बिज़नेस करने वाले और पेशेवर
रिजीम बदलने का नियम सख़्त है। बिज़नेस की आमदनी न हो तो आप हर साल नए सिरे से कोई भी रिजीम चुन सकते हैं। बिज़नेस या पेशे की आमदनी हो तो:
- FY 2025-26: पुरानी रिजीम में जाने के लिए रिटर्न की आख़िरी तारीख तक Form 10-IEA भरना होता है। नई रिजीम में वापसी जीवन में सिर्फ़ एक बार, बाद के किसी साल से, हो सकती है।
- FY 2026-27: 2025 के अधिनियम की धारा 202(4) वही ढाँचा रखती है। आप धारा 263(1) की आख़िरी तारीख तक बाहर निकलने का विकल्प चुनते हैं, वह चुनाव आगे के सालों पर भी लागू रहता है, और उसे सिर्फ़ एक बार वापस लिया जा सकता है — उसके बाद फिर कभी नहीं, जब तक आपकी बिज़नेस की आमदनी बंद न हो। फ़ॉर्म अधिनियम नियमों पर छोड़ता है।
अनुमानित आय। 44ADA में पेशेवर की प्राप्तियों के 50% पर टैक्स लगता है, और 44AD में छोटे बिज़नेस की बैंक और डिजिटल तरीक़ों से मिली प्राप्तियों के 6% और बाक़ी के 8% पर। FY 2026-27 में ये स्कीमें पेशे की ₹50 लाख तक की प्राप्तियों और बिज़नेस के ₹2 करोड़ तक के टर्नओवर पर खुली हैं — नक़द प्राप्तियाँ 5% के भीतर हों तो ₹75 लाख और ₹3 करोड़।
उदाहरण: 44ADA में ₹40,00,000 की प्राप्तियों वाला कंसल्टेंट, पुरानी रिजीम में 80C के ₹1,50,000 और ₹50,000 के हेल्थ इंश्योरेंस के साथ। यह सैलरी नहीं है, इसलिए स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं मिलता।
| 44ADA, ₹40 लाख की प्राप्तियाँ | रकम |
|---|---|
| टैक्स लगने वाली आमदनी (प्राप्तियों का 50%) | ₹20,00,000 |
| नई रिजीम, सेस सहित टैक्स | ₹2,08,000 |
| पुरानी रिजीम, सेस सहित टैक्स | ₹3,66,600 |
क्योंकि वापसी सिर्फ़ एक बार हो सकती है, इसलिए सिर्फ़ इस साल नहीं, अगले कुछ सालों को सोचकर तुलना कीजिए। इनकम टैक्स कैलकुलेटर में 44AD और 44ADA के लिए अलग हिस्सा है।
रिजीम कैसे और कब चुनते हैं
- बिज़नेस की आमदनी के बिना, FY 2025-26: चुनाव रिटर्न में ही होता है, और सिर्फ़ आख़िरी तारीख तक भरा रिटर्न ही पुरानी रिजीम चुन सकता है। देर से भरे रिटर्न पर नई रिजीम से टैक्स लगता है; समय पर भरा रिटर्न संशोधित करने पर आपका चुनाव बना रहता है।
- बिज़नेस की आमदनी के बिना, FY 2026-27: 2025 के अधिनियम की धारा 202(4) चुनाव को उस टैक्स ईयर के धारा 263(1) के तहत भरे रिटर्न से जोड़ती है।
- बिज़नेस की आमदनी के साथ: ऊपर बताया फ़ॉर्म और सिर्फ़ एक बार की वापसी।
- नौकरी में: नियोक्ता पूछता है कि साल के लिए आप कौन-सी रिजीम चाहते हैं, और उसी हिसाब से आपकी सैलरी से TDS काटता है। न बताने पर TDS नई रिजीम से कटता है। नियोक्ता को बताना ख़ुद चुनाव नहीं है: वह अलग से, ऊपर बताए तरीके से होता है। यह नियम CBDT का सर्कुलर नं. 4/2023 है, जो 1961 के अधिनियम के तहत FY 2023-24 और आगे के सालों के लिए जारी हुआ।
इन ग़लतियों से बचिए
- देर से रिटर्न भरकर पुरानी रिजीम की उम्मीद। FY 2025-26 में देर से भरे रिटर्न पर नई रिजीम से टैक्स लगता है, कटौतियाँ चाहे जितनी हों।
- ₹12 लाख को सैलरी समझना। सीमा टैक्स योग्य आमदनी पर है; स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ करीब ₹12.75 लाख तक की सैलरी इसमें आती है।
- मार्जिनल राहत भूल जाना। ₹12 लाख से थोड़ा ज़्यादा कमाने पर पूरे स्लैब का टैक्स नहीं लगता।
- HRA और 80GG दोनों क्लेम करना। 80GG सिर्फ़ तब है जब हाउस रेंट अलाउंस न मिलता हो।
- अनिवासी होकर रिबेट की उम्मीद। यह सिर्फ़ निवासी व्यक्तियों के लिए है।
- ऐसी कटौती के लिए निवेश, जो काम ही न आए। अगर आपके लिए नई रिजीम सस्ती है, तो 80C का निवेश कोई टैक्स नहीं बचाता।
अपने आँकड़ों के लिए कैलकुलेटर
- इनकम टैक्स कैलकुलेटर — दोनों रिजीम आमने-सामने, दोनों में से कोई भी साल, अनुमानित आय के साथ।
- टेक-होम सैलरी कैलकुलेटर — PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और टैक्स के बाद हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी।
- HRA कैलकुलेटर — पुरानी रिजीम में आपके HRA का कितना हिस्सा टैक्स-फ़्री है।
- 80C कैलकुलेटर — ₹1.5 लाख की सीमा में से कितना इस्तेमाल हुआ।
- कैपिटल गेन कैलकुलेटर — शेयर, प्रॉपर्टी और सोना, जिनकी दोनों रिजीम में अपनी अलग दरें हैं।
- रिटर्न भर रहे हैं? देखिए ITR फाइलिंग के लिए ज़रूरी दस्तावेज़।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या नई रिजीम में ₹12 लाख तक की आमदनी टैक्स-फ़्री है?
हाँ, अगर आप निवासी व्यक्ति हैं। रिबेट ₹12 लाख तक की टैक्स योग्य आमदनी का टैक्स ख़त्म कर देता है, FY 2025-26 और FY 2026-27 दोनों में। ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ करीब ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं लगता।
रिबेट में मार्जिनल राहत क्या है?
₹12 लाख की टैक्स योग्य आमदनी से ज़रा ऊपर, नई रिजीम का टैक्स उतनी ही रकम तक सीमित रहता है जितनी आमदनी ₹12 लाख से ऊपर है, ताकि आमदनी में थोड़ी बढ़ोतरी पर उस बढ़ोतरी से ज़्यादा टैक्स न लगे।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए कौन-सी रिजीम बेहतर है?
करीब ₹12.75 लाख से कम आमदनी वाले ज़्यादातर पेंशनभोगियों के लिए नई रिजीम: वहाँ तक वह कोई टैक्स नहीं लेती, इसलिए पुरानी रिजीम की बड़ी शून्य-टैक्स सीमा और वरिष्ठ-कटौतियाँ ज़्यादा से ज़्यादा बराबरी पर ला सकती हैं। उससे ऊपर, या बड़ी कटौतियों के साथ, दोनों की तुलना कीजिए।
क्या मैं हर साल पुरानी और नई रिजीम के बीच बदल सकता हूँ?
हाँ, अगर आपकी बिज़नेस या पेशे की आमदनी नहीं है: आप हर साल आख़िरी तारीख तक भरे रिटर्न में चुनते हैं। बिज़नेस की आमदनी हो तो चुनाव आख़िरी तारीख तक होता है, आगे के सालों पर लागू रहता है, और सिर्फ़ एक बार पलटा जा सकता है।
क्या नियोक्ता को अपनी रिजीम बताना ज़रूरी है?
नियोक्ता हर साल पूछता है कि आप कौन-सी रिजीम चाहते हैं, और उसी हिसाब से आपकी सैलरी से TDS काटता है। न बताने पर TDS नई रिजीम से कटता है। यह ख़ुद चुनाव नहीं है: चुनाव अलग से रिटर्न में होता है, या FY 2025-26 में बिज़नेस की आमदनी हो तो Form 10-IEA से। नियम CBDT का सर्कुलर नं. 4/2023 है, जो 1961 के अधिनियम के तहत जारी हुआ।
Form 10-IEA क्या है?
यह वह फ़ॉर्म है जो बिज़नेस या पेशे की आमदनी वाला व्यक्ति रिटर्न की आख़िरी तारीख तक भरकर नई रिजीम से पुरानी में जाता है — FY 2025-26 के लिए, 1961 के अधिनियम के तहत। जीवन में एक बार वाली वापसी के लिए भी यही फ़ॉर्म इस्तेमाल होता है।
क्या देर से रिटर्न भरने पर पुरानी रिजीम चुन सकते हैं?
FY 2025-26 के लिए नहीं, अगर बिज़नेस की आमदनी नहीं है: पुरानी रिजीम के लिए रिटर्न आख़िरी तारीख तक भरा होना चाहिए, या उसी का संशोधन हो। देर से भरे रिटर्न पर नई रिजीम से टैक्स लगता है।
44ADA वाले पेशेवर के लिए कौन-सी रिजीम ठीक है?
आम तौर पर नई। पेशेवर के पास उसमें खोने को न स्टैंडर्ड डिडक्शन है न HRA, इसलिए पुरानी रिजीम को बराबरी के लिए 80C और 80D जैसी बड़ी कटौतियाँ चाहिए। दोनों की तुलना कीजिए, और याद रखिए कि नई रिजीम में वापसी सिर्फ़ एक बार हो सकती है।
नई रिजीम में कौन-सी कटौतियाँ मिलती हैं?
मुख्य रूप से ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन और सैलरी के 14% तक नियोक्ता का NPS योगदान। 80C, 80D, HRA, अपने रहने वाले घर के होम लोन का ब्याज और बाक़ी ज़्यादातर कटौतियाँ सिर्फ़ पुरानी रिजीम में मिलती हैं।
क्या FY 2026-27 में स्लैब बदले हैं?
नहीं। FY 2026-27 आयकर अधिनियम, 2025 के तहत आता है, जिसने धाराओं के नंबर बदले हैं — नई रिजीम धारा 202 है और रिबेट धारा 156 — पर स्लैब, रिबेट और कटौतियों की सीमाएँ FY 2025-26 जैसी ही हैं।
क्या नई रिजीम में HRA क्लेम हो सकता है?
नहीं। HRA की छूट सिर्फ़ पुरानी रिजीम में मिलती है, दोनों सालों में।
यह FY 2026-27 और FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए सामान्य जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं। हर बजट में दरें और नियम बदल सकते हैं — अगला बजट 1 फ़रवरी 2027 को आना है — इसलिए फाइल करने से पहले पुष्टि कीजिए, और अपनी स्थिति के लिए किसी टैक्स पेशेवर से सलाह लीजिए।