अपनी होम लोन की EMI निकालिए
होम लोन सबसे लंबे और सबसे बड़े क़र्ज़ होते हैं — आम तौर पर 20–30 साल के लिए। ज़्यादातर होम लोन फ़्लोटिंग रेट पर होते हैं, यानी RBI की रेपो दर बदलने पर आपकी EMI या अवधि भी बदल सकती है। अपनी लोन राशि, ब्याज दर और अवधि डालिए — EMI, कुल ब्याज और पूरा शेड्यूल दिख जाएगा। अवधि थोड़ी घटाने से भी कुल ब्याज में बड़ा फ़र्क़ पड़ता है। सब कुछ आपके ब्राउज़र में चलता है।
यह टूल कौन इस्तेमाल करता है
वे लोग जो घर ख़रीदने की योजना बना रहे हैं, अलग-अलग बैंकों की दरें तोल रहे हैं, या यह देखना चाहते हैं कि अवधि घटाने या प्रीपेमेंट करने से कुल ब्याज कितना बचेगा।
इसे कैसे इस्तेमाल करें
- अपनी लोन राशि, ब्याज दर और अवधि डालिए।
- चाहें तो लोन शुरू होने का महीना डालिए ताकि शेड्यूल में असली तारीख़ें दिखें।
- EMI निकालें दबाइए और अपनी EMI, कुल ब्याज तथा साल-दर-साल शेड्यूल देखिए। किसी भी साल पर टैप करके उसके महीने खोलिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
होम लोन ज़्यादा से ज़्यादा कितने साल का हो सकता है?
आम तौर पर 20–30 साल तक (कुछ बैंक 35 साल तक देते हैं)। अवधि लंबी करने पर EMI घटती है, पर कुल ब्याज बढ़ जाता है।
क्या होम लोन पर टैक्स छूट मिलती है?
पुरानी टैक्स व्यवस्था में: मूलधन पर धारा 80C के तहत (₹1.5 लाख तक) और ब्याज पर धारा 24(b) के तहत (अपने घर के लिए ₹2 लाख तक)।
फ़िक्स्ड रेट या फ़्लोटिंग?
ज़्यादातर होम लोन फ़्लोटिंग रेट पर होते हैं, जो RBI की रेपो दर से जुड़े रहते हैं — इसलिए दरें बदलने पर EMI या अवधि बदल सकती है।
मैं कितनी EMI उठा सकता/सकती हूँ?
बैंक चाहते हैं कि आपकी सारी EMI मिलाकर मासिक शुद्ध आय के लगभग 40–50% के अंदर रहें — इसे हाथ में आने वाली सैलरी पर तौलिए, CTC पर नहीं।